मेरे एक दोस्त की तरह अगर आपका भी खाता एसबीआई में है और आप उसे ‘सेफ डिपॉजिट’ समझकर भूल गए हैं तो सावधान हो जाइए। भारतीय स्टेट बैंक ने कुछ ऐसे नए नियम लागू किए हैं जिनकी जानकारी न होने पर आपके खाते से पैसे चुपचाप कट सकते हैं। यह कोई डराने की बात नहीं, बल्कि पिछले महीने मेरे चाचा के साथ ऐसा ही हुआ था जब उनके खाते से 236 रुपये ‘डेबिट कार्ड चार्ज’ के नाम पर गायब हो गए।
लंबे समय से बंद पड़े खाते हैं सबसे बड़ा निशाना
अगर आपने अपने SBI खाते से दो-तीन साल से कोई लेनदेन नहीं किया है तो समझ लीजिए कि यह खाता बैंक की नजर में ‘निष्क्रिय’ हो चुका है। आपको याद भी नहीं होगा लेकिन बैंक इसे ‘इनऑपरेटिव अकाउंट’ मानकर धीरे-धीरे सभी सुविधाएं बंद करना शुरू कर देगा। सबसे बुरी बात यह है कि बैंक आपको इसकी कोई चेतावनी भी नहीं देता। यह नियम बैंक के लिए सुरक्षा जरूर है, लेकिन आम ग्राहकों के लिए एक छिपा हुआ खतरा बन गया है।
डेबिट कार्ड का सालाना चार्ज 236 रुपये हर साल कटेंगे
अगर आपके पास SBI का डेबिट कार्ड है तो यह जान लीजिए कि हर साल आपके खाते से कम से कम 236 रुपये जरूर कटेंगे। यह 200 रुपये का वार्षिक मेंटेनेंस चार्ज है और उस पर 18% GST। यह चार्ज आमतौर पर साल की शुरुआत में लिया जाता है। बहुत से लोगों को पता ही नहीं चलता और अचानक खाते की बैलेंस कम देखकर उनकी नींद उड़ जाती है। यह चार्ज रेगुलर सिल्वर और ग्लोबल डेबिट कार्ड्स पर लागू होता है।
mCASH सेवा बंद अब ये विकल्प अपनाएं
दिसंबर 2025 से SBI ने अपनी पुरानी mCASH सर्विस को हमेशा के लिए बंद कर दिया है। अगर आप अभी तक इसका इस्तेमाल पैसे ट्रांसफर करने के लिए कर रहे थे, तो अब आपको UPI, IMPS या NEFT जैसे ज्यादा सुरक्षित और तेज विकल्पों पर आना होगा। यह बदलाव थोड़ा परेशान करने वाला है, लेकिन सच्चाई यही है कि पुरानी तकनीक को बदलना ही पड़ता है। आपके पास अब Google Pay, PhonePe या सीधे बैंकिंग ऐप के जरिए पेमेंट का बेहतर विकल्प है।
पैसे कट गए हैं तो घबराएं नहीं यह करें
अगर आपके खाते से बिना बताए कोई रकम कट गई है या फिर आपको लगता है कि खाता अचानक निष्क्रिय कर दिया गया है, तो सीधे सबसे पहले बैंक शाखा में संपर्क करें। वहां जाकर शिकायत दर्ज करवाएं। इसके अलावा आप SBI की ऑफिशियल वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं। जल्दी कार्रवाई से अक्सर पैसे वापस भी मिल जाते हैं। मेरे चाचा ने यही किया और उनकी समस्या हल हो गई।
थोड़ी सजगता आपको बचा सकती है
आखिर में बात सिर्फ इतनी है कि बैंकिंग नियम बदलते रहते हैं और हमें इनसे अपडेट रहना चाहिए। अपने खाते को साल में कम से कम एक बार जरूर एक्टिवेट कर लें थोड़ा सा लेन-देन कर दें। डेबिट कार्ड के चार्ज को ध्यान में रखें और पुरानी सर्विसेज की जगह नए डिजिटल ऑप्शन सीख लें। यह थोड़ी सी मेहनत आपको बड़ी मुसीबत और पैसों के नुकसान से बचा सकती है। सावधानी हटी दुर्घटना घटी यह कहावत बैंकिंग के मामले में भी बिल्कुल सच है।